सैलाना विधानसभा क्षेत्र के राजापुरा गांव में क्रांतिकारी जननायक टंटिया भील की प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रशासन और स्थानीय विधायक के बीच बड़ा टकराव सामने आया है। एक ओर जहां एसडीएम ने ग्रामसभा के प्रस्ताव को नियमों के विरुद्ध बताकर अनुमति देने से इनकार कर दिया, वहीं विधायक कमलेश्वर डोडियार ने देर रात करीब 2:30 बजे स्वयं उपस्थित रहकर प्रतिमा स्थापित करवा दी।
प्रशासनिक अड़चन और पुलिस का डर :
ग्रामीणों का कहना है कि वे राजापुरा गांव में प्रतिमा स्थापना हेतु ग्रामसभा का प्रस्ताव और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेकर एसडीएम सैलाना के पास सूचना देने पहुंचे थे। आरोप है कि एसडीएम ने पेसा नियम 2022 का हवाला देते हुए ग्रामसभा की कार्यवाही को अवैध करार दिया और पुरातत्व विभाग समेत अन्य विभागों की एनओसी लाने की शर्त रख दी। इस दौरान ग्रामीणों को पुलिस कार्रवाई का डर भी दिखाया गया।
आधी रात को राजस्थान से पहुंची प्रतिमा :
जैसे ही इस मामले की जानकारी विधायक कमलेश्वर डोडियार को लगी, उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार किया। विधायक स्वयं ग्रामीणों के साथ राजस्थान के तलवाड़ा (बांसवाड़ा) पहुंचे और वहां से टंटिया भील की प्रतिमा लेकर देर रात राजापुरा गांव पहुंचे। भारी उत्साह के बीच रात करीब ढाई बजे प्रतिमा को उसके स्थान पर स्थापित किया गया।
पेसा कानून का अक्षरशः पालन करेंगे: विधायक :
इस मौके पर विधायक डोडियार ने कहा, "अनुसूचित क्षेत्र में पेसा नियम का एक-एक अक्षर लागू किया जाएगा। हम क्षेत्रवासियों को कानूनी रूप से जागरूक करेंगे ताकि आदिवासी इलाकों में राजनीति से प्रेरित कर्मचारियों के हस्तक्षेप को खत्म किया जा सके।" उन्होंने स्पष्ट किया कि 25 जनवरी को प्रतिमा का भव्य अनावरण और जनजागृति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
ये रहे मौजूद :
प्रतिमा स्थापना के दौरान जिला पंचायत सदस्य शरद डोडियार, पूर्व सदस्य कविता भगोरा, ध्यानवीर डामोर (आदिवासी छात्र संगठन), मांगू सिंह सिंगाड (जयस भील एकता मिशन), कनीराम सिंगाड़, भुरजी, भानजी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।