81.65 लाख के सड़क निर्माण पर बवाल : निजी स्वार्थ के आगे आदिवासी हितों की बलि चढ़ाने की कोशिश ?
Raj Kumar Luniya
Fri, Jun 12, 2026
सैलाना नगर के वार्ड क्रमांक 09 में 81.65 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद में तब्दील हो चुका है। आरोप है कि नगर परिषद और प्रशासन के कुछ जिम्मेदार, केवल एक रसूखदार व्यक्ति मनीष धबाई को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सड़क का मूल रास्ता बदलने का प्रयास कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो वर्षों से सड़क की आस लगाए बैठी एकलव्य आदिवासी कॉलोनी सहित आसपास के हजारों परिवार इस बुनियादी सुविधा से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे।
भूमिपूजन के मंच पर ही आमने-सामने आए नेता : यह पूरा विवाद बुधवार (10 जून) को आयोजित सड़क भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से फूट पड़ा। मंच पर मौजूद क्षेत्रीय सांसद अनीता नागर सिंह चौहान के सामने ही स्थानीय विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया।
विधायक डोडियार ने कार्यक्रम में उपस्थित नगर परिषद के सीएमओ को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि: "सड़क का निर्माण किसी के निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए हो रहा है। इसका निर्माण केवल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 22 फीट चौड़े शासकीय मार्ग पर ही किया जाए।"
विधायक ने सांसद चौहान और पूर्व विधायक संगीता चारेल से भी इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर आदिवासी समाज को न्याय दिलाने का आग्रह किया। विवाद का मुख्य कारण राजस्व रिकॉर्ड का 22 फीट चौड़ा शासकीय रास्ता छोड़, एक निजी व्यक्ति के खेत से सड़क निकालने का कथित प्रयास बताया है। एकलव्य आदिवासी कॉलोनी व आसपास के हजारों परिवार प्रभावित होंगे। अन्याय हुआ तो बर्दाश्त नहीं करेंगे: चारेल परिवार
मामले में आदिवासी समाज के समर्थन में उतरते हुए पूर्व विधायक संगीता चारेल और पूर्व मंडी अध्यक्ष विजय चारेल ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि सैलाना नगर में आदिवासी समाज के हितों की अनदेखी और उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विकास कार्यों का लाभ गरीबों और आदिवासियों तक पहुंचना चाहिए, न कि किसी एक व्यक्ति की सुख-सुविधा के लिए सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो।
विधायक डोडियार ने संभाला मोर्चा, उज्जैन से रतलाम तक दौड़े पत्र : मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक कमलेश्वर डोडियार ने गुरुवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ी घेराबंदी की है। उन्होंने एक साथ संयुक्त संचालक (नगरीय विकास एवं आवास) उज्जैन, कलेक्टर रतलाम, एसडीएम और तहसीलदार सैलाना को आधिकारिक पत्र भेजे हैं। पत्र में मांग की गई है कि तत्काल विवादित स्थल का सीमांकन कराया जाए और नियमानुसार शासकीय भूमि पर ही सड़क निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
जनता की नजरें अब प्रशासन पर : अब क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि 81.65 लाख रुपये का यह विकास कार्य हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन में उजाला लाएगा या फिर यह पूरा मामला रसूखदारों के गठजोड़ और आरोपों की फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, पूरे सैलाना क्षेत्र की निगाहें अब कलेक्टर और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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भड़के जनप्रतिनिधि
सड़क पर घमासान
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