: आज का विचार में आज खास : नवयुवकों द्वारा कटे फ़टे कपड़े पहनना व पक्षी के घोंसले जैसे बाल रखना फैशन नही शौक
Fri, Mar 24, 2023
प्रिय पाठकों ? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फ़टे कपड़े पहनने से हमारी शारिरिक क्षमता एवं ऊर्जा को नष्ट करते है । तन व मन को शिथिल बनाकर अनेक बीमारियों को जन्म देने वाले बना देते है । भारतीय संस्कृति के अनुसार यदि कपड़े फटे हो तो उसे सिलकर पहना जा सकता हैं लेकिन फटे कपड़े बिल्कुल भी नही पहनना चाहिए । फटे कपड़ो का सीधा शुक्र से सम्बन्ध है । फटे कपङे पहनने से शुक्र कमजोर हो जाता
हैं । जिससे जीवन मे दरिद्रता व आर्थिक मुश्किलें बढ़ जाती है । इसके साथ ही वैवाहिक जीवन औऱ जिंदगी में परेशानियों का
सामना करना पड़ सकता हैं । फ़टे कपड़े पहनने से आजकल के युवक बिल्कुल परहेज़ नही करते । अब तो नवयुवतियों में भी यह
चलन दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है । अब यह फैशन नही शौक बन गया है ।
कटे फ़टे कपड़े पहनने की शुरुआत :
सन 1970 के पहले की हम बात करें तो कटे फ़टे कपड़े ग़रीब घर के लोग उसे सीकर पहनते थे तब अमीर लोग मज़ाक उड़ाते है । लेकिन आजकल के युवक व युवतियां सिले कपड़ों को फाड़कर पहनते है , जिनका ग़रीब मज़ाक उड़ा रहे है ।
भारतीय संस्कृति पर भारी आघात :
कटे फ़टे कपड़े पहनने वाले भारतीय संस्कृति को पाश्चात्य संस्कृति की औऱ धकेल रहे है । कही ऐसा न हो कि एक दिन भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य
संस्कृति कब्जा कर लेवे । अब तो ऐसा लगता है , जैसे अमीर गरीबों का मज़ाक उड़ा रहें है ।
भारतवर्ष में शरीर पर टैटू गुदवाना भी फैशन :
शरीर पर टैटू गुदवाना ये भी एक फैशन नही शौक है । यह अभी तक तो विदेशों में ही चल रहा है , लेकिन भारतवर्ष में भी यह धीरे धीरे अपने पैर पसार रहा है । इसकी शुरुआत फ़िल्म इंडस्ट्रीज से हुई थी ।
अब इसे फ़ैशन कहे या शौक पक्षियों के घोंसले जैसे बाल :
आजकल के नवयुवक धोती कुर्ता , कमीज़ पायजामा पहनना भूल चुके है । अब तो नवयुवक अपने सिर की हेयर स्टाइल इस तरह रख रहे है जैसे उन्होंने कोई
पक्षी पाल रखे हो जो उनके सिर पर बने घोसले में सांयकाल आकर आराम करेंगे व अंडा देगे ।
" अब भारतवर्ष मैं वो दिन दूर नही जब पूरी पाश्चात्य संस्कृति , भारतीय संस्कृति पर हावी हो जाएंगी , जिसके लिए हम सब जिम्मेदार होगें , औऱ जल्द ही एक नई फैशन का हम सबको बेसबरी से इंतज़ार "।
हर भारतवासी को अपनी जिम्मेदारिया निभाते हुए अपने परिवार में बच्चों को समझाना
चाहिए।
: 7 या 8 कब है होली ? जानिए होलिका दहन का शुभ महूर्त
Sun, Mar 5, 2023
हिंदू पंचाग के अनुसार होली हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार होली 2 दिन मनाया जाने वाला बेहद ही रंगीन और खुशियों भरा त्यौहार है। इस त्योहार के पहले दिन होलिका दहन मनाया जाता है और दूसरे दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंग, अबीर, गुलाल लगाते हैं और बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं। वहीं धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन स्नान-दान कर उपवास रखने से मनुष्य के दुखों का नाश होता है और उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई का दिन के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि होली कब है? होलिका दहन कब है और होलिका दहन का समय क्या है?
फाल्गुन माह पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 6 मार्च 2023 को 4 बजकर 17 मिनट
फाल्गुन माह पूर्णिमा तिथि का समापन: 7 मार्च 06 बजकर 09 मिनट
होलिका दहन शुभ मुहूर्त- 7 मार्च 2023 की शाम को 6 बजकर 24 मिनट से लेकर 8 बजकर 51 मिनट
होलिका दहन से पहले होली पूजन का विशेष विधान है। इस दिन सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद होलिका पूजन वाले स्थान में जाए और पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठ जाएं। इसके बाद पूजन में गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाएं। इसके साथ ही रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, हल्दी, मूंग, मीठे बताशे, गुलाल, रंग, सात प्रकार के अनाज, गेंहू की बालियां, होली पर बनने वाले पकवान, कच्चा सूत, एक लोटा जल मिष्ठान आदि के साथ होलिका का पूजन किया जाता है। इसके साथ ही भगवान नरसिंह की पूजा भी करनी चाहिए। होलिका पूजा के बाद होली की परिक्रमा करनी चाहिए और होली में जौ या गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि चीज़ें डालनी चाहिए।